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Sharanpur Baba Ji Satsang with Shabad

बाबा जी की मौज़ूदगी में मगँलवार को भाई अफज़ाल अहमद ने, सहारनपुर में तुलसी साहिब जी की बाणी से एक ग़ज़ल पे सत्सँग किया था
सुन ऐ तकी, ना जाईओ, जिनहार देखना, अपने में आप, जलवा ऐ दिलदार देखना
भाई साहिब जी ने बहुत ही प्यारा सत्सँग किया था
बाबा जी ने उन्हें अपने कमरे में बुलाकर बहुत अच्छी सेवा करने के लिए शाबाशी दी और फरमाया, ऐसे ही मेहनत करते रहो, प्रेम प्यार से सेवा करते रहो, मैं आपकी सेवा से बहुत खुश हूँ
सत्सँग कर्ता भाई अफज़ाल ने बाबा जी के चरणों मे लेट कर प्रेम के आँसू बहाते हुए प्रणाम किया
वहाँ से वापिस जाते हुए अफज़ाल भाई ने बाबा जी की तरफ अपनी पीठ नहीं की बल्कि उल्टे पैरों से चलते हुए कमरे से बाहर आये, जब किसी सेवादार ने इसका कारण पूछा तो आपने, रोते हुए बतलाया, क्या आप ख़ुदा की तरफ पीठ कर सकते हैं,

मैं भला कैसे करता ?
हम सभी की बहुत ऊँची किस्मत है कि हमें ऐसे शहनशाह, सतगुरु मिले हैं जी
राधा स्वामी जी Story sent by satsangi..
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