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Sewa ke bare main Sewadaro ko Misunderstandings

सेवा के बारे में गलतफहमियां,,
कई बार हम सोचते हैं कि हमें कोई ख़ास सेवा इसलिए दी गई है
क्योंकी हम बड़े लायक है, स्मार्ट हैं, या पढ़े लिखे है, या
फिर इसलिए कि हम बातचीत में बड़े कुशल है या विनमर है!
हम अपने आप में फखर महसूस करते है कि हम में ये गुण है
हालांकी बहुत से मामलों में तो हम अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते
कि किसी कोई सेवा क्यों दी गई है ! डेरे मे यह बात्त मशहूर है
कि किसी विश्वविद्यालय के उप्प कुल्पती को डेरे के froot
stall पर सेवा दी गई थी ! डेरे मे और देश विदेश भर के
अनय सत्संग केन्द्रों में, समाज के अलग अलग वरग के लोग हर
तरह की सेवा में लगे हुए है ! डॉक्टर मिट्टी की सेवा में लगे है,

सरकारी अफ़सर भोजन परोस रहे है, फौज के अफ़सर रसोई
में बर्तन साफ़ कर रहे है ! अध्यापक और प्रोफेसेर toilet
साफ़ करने में लगे है ! जज और वकील ट्रैफिक कीं सेवा
में लगे हुए है !
सेवा सदगुरु की तरफ़ से हमें दिया हुआ तोहफ़ा है जो किसी
सेवादार को उसकी जरूरत के मुताबिक दिया जाता है और यह
बात्त सिर्फ़ सदगुरु जानते है ! लेकिन सदगुरु हम में क्या
देखते है – यह हमारे लिए एक राज़ है !
“सेवा कीतिया मुकदी नहीं,
“ना कीतिया रुकदी नहीं,

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