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Satsangi ne Ek Bibi ji ki Sakhi Sunai…..

महाराज जी के पास एक स्त्री आती है।
कहती है आप ने जो नामदान मुझे बक्शा है, वो वापिस ले लीजिये।
महाराज जी बोले क्यो. . ?
स्त्री कहने लगी भजन पे बैठती हूँ मन लगता नही,भजन होता नही। और अगर भजन पर नही बैठती तो बेचैनी
होती है ,मूड खराब हो जाता है। ,अब महाराजी आप बताए मै नाम दान वापीस ना करूँ तो क्या करूँ….?
महाराज जी बोले बेटी एक शरत पे मै दिया हुआ नामदान वापिस ले सकता हूँ.?
स्त्री बोली वो क्या शरत है महाराज जी ?
महारज जी बोले बेटी मैं आटे में नमक डालता हूँ आप उसे आटे मे से नमक अलग करके दिखा दो फिर आप
चाहो तो मैं अपना दिया नामदान वापिस ले लूँगा।
यह सुन स्त्री महाराज जी के चरनो मे गिर पडी।
सो गुरू का बकशा नाम एक रसायन की तरह हमारे तन मन वजूद मे घुल जाता है जो शिष्य का चोला
छोडने तक मरते दम तक साथ रहता है।.

पहरा देती है मुर्शद की नजर हर दम,,
मजाल है कोई बुरी बला छू जाए हमको।
क्यों करते हो गरूर अपनी ठाठ पर..!!
मुट्ठी भी खाली रह जायेगी
जब पहुँचोगे घाट पर….!!!!
बड़ी ही प्यारी दोस्तों की संगत मिली,
सभी गुरुमुख ही गुरुमुख मिले जो सतगुरु की रेहमत
मिली,
लाख लाख शुक्र करूँ तेरा दाता जो दुनिया की भीड़ से बचाए रखा,
अच्छे लोगों से जोड़ मेरा मन गुरु कृपा में लगाए रखा!!!

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