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Sakhi.. Jo hame Malik ki Bahkti nhi krne deti

वह कौन सी चीज है जो हमें मालिक की भक्ति नहीं करने देती?
वह देह का प्यार है जो हम देह में बैठ कर दिन रात ऐशो इशरत
शराबो कबाबो आदि में लगे हुए हैं हमें अच्छी तरह विचार करना
चाहिए कि हमारा इस देह के साथ क्या संबंध है यह किराए का
मकान है पराया मकान हैं काल का पिंजरा है जितने जितने सांस
परमात्मा ने बक्शे हैं उन्हें पूरा करने के बाद इस देह को यहीं छोड़
जाना है यह देह आज तक न किसी के साथ गई है और नहीं
जा सकती है जब इस देह को साथ नहीं जाना तो इस में बैठ
कर जो दुनिया के साथी हम ने बनाए हैं वह हमारी क्या सहायता
कर सकते हैं? हम अपने भाइयों-बहनों मित्रों और संबंधियों के
लिए कौन-कौन सी ठगिया और बेईमानीया नहीं करते किन-किन
उसूलों को कुर्बान नहीं करते ! उनके लिए कितना समय बर्बाद
करते हैं ! उन सब का संबंध केवल हमारे शरीर के साथ है
इनमें से कई हमें छोड़ कर चल देते हैं और कईयों को हम छोड़

जाते हैं मौत के समय यह सब हमारे आस पास ही बैठे रह जाते
हैं किसी को यह भी पता नहीं चलता कि मौत के फरिश्ते किधर
से आते हैं और हमें लेकर किधर चले जाते हैं इन सब से हमारा
केवल लेन-देन का संबंध है और गरजो का प्यार है कोई यार
दोस्त बनकर आ गया कोई बहन या भाई बनकर आ गया कोई
बेटा बेटी बनकर आ गया जैसे जैसे इनके साथ लेन देन का हिसाब
खत्म होता है सब अपनी अपनी राह पर चल पड़ते हैं इसलिए इनमें
अपना फर्ज समझकर रहने की कोशिश करनी चाहिए दुनिया को
छोड़ कर जंगलों और पहाड़ों की ओर दौड़ने की कोशिश नहीं करनी
है संतमत हमें कायर और बुजदिल नहीं बनाता हमें दुनिया में रहना
है सूरमा और बहादुर बनकर रहना है लेकिन दुनिया में रहते हुए भी
दुनिया की मैल में नहीं पडना अपने ख्याल को “शब्द या नाम” के
साथ जोड़ कर रखना है।
“राधास्वामी जी”

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