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Radha Soami Ji Beautiful Saakhi Beas Old Sewadaar

Radha Soami Ji Beautiful Saakhi
एक बार एक बहुत बजुर्ग आदमी डेरे में नामदान की लाईन में लगा हुआ था।
सेवादार नें उसको समझने की कोशिश की कि बाबा जी अब आपकी उम्र जायदा हो गई है।
अब आप को नामदान नहीं मिल सकता। पर वो नहीं माना बोला या तो मुझे अभी नामदान की पर्ची दे दो नहीं तो मैने यहीं प्राण त्याग देने हैं।
अब तो सेवादारों के लिए परेशानी खड़ी हो गयी….!!
उनहोंने सैक्टरी साहब को काल किया तो जवाब मिला कि आप पर्ची दे दो अगर निकालना होगा तो बाबा जी खुद ही निकाल देंगे और उसे पर्ची मिल गई।
नामदान वाले दिन वो बजुर्ग लाईन में सबसे आगे बैठा था।
बाबा जी नें उसको कहा अपनी सारी उम्र निकल जाने के बाद आप अब आए हो नामदान लेने।
वो बोला बाबा जी मुझे नामदान नहीं लेना मुझे तो मुक्ति चाहिए। बाबा जी बोले उसके लिए तो नामदान लेकर भजन सिमरन करना पड़ेगा…!!
वो बोला मैं अब चौंकड़ी मार कर नहीं बैठ सकता मेरा शरीर अब इसकी इजाजत नहीं देता…!!
बाबा जी नें उसी वक्त उसके लिए कुर्सी मंगवाई और पूछा अब तो ठीक है, अब हो जाएगा….!!
वो बोला हांजी अब ठीक है, ऐसे तो मैं कर लूंगा। फिर बाबा जी नें सारी उपस्थित संगत को नामदान दिया।
अपने घर वापिस लौट कर वो भजन सिमरन में जुट गया।

दिन रात एक कर दिया और बाबा जी की दया मेहर से दस दिन में ही उसका अंदर पर्दा खुल गया।
अब तो वो इस दुनिया का ना रहा, लगा बोलने, अंदर की बातें बताने लगा।
बोला कल सुबह मैने चले जाना है, मेरा वक्त पूरा हो गया है, मेरे सतगुर नें मुझे लेने आना है…!!
और वो खुशी से झूम रहा था, दीवाना हो गया था। रात को उसने नहा कर धुले हुए कपड़े पहने और घर वालों से बोला मैने नहा कर कपड़े बदल लिए हैं।
सुबह मैने चले जाना है, अब मुझे नहलाना मत ऐसे ही मेरा संस्कार कर देना। घर वालों नें सोचा जब से यह नामदान लेकर आया है। पागलों जैसी हरकतें कर रहा है।
पता नहीं क्या हो गया है इसे सारी सारी रात कुर्सी पर ही बैठा रहता है, सोता ही नहीं।
सुबह जब काफी दिन निकलने तक भी वो कमरे से बाहर नहीं निकला तो घर वालों ने दरवाजा खोल कर देखा तो उसका निर्जीव शरीर वहां कुर्सी पर पड़ा था। और वो जा चुका था।
सदा के लिए अपने सतगुर के साथ जी जान से भजन सिमरन करने वालों पर मालिक की दया मेहर जरूर होती है

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