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Kuch Din pehle baba ji ne Patiala Satsang kia

कुछ दिन पहले बुधवार को बाबा जी ने पटियाला के सत्संग घर में आकर संगत को अपने दिव्य स्वरूप के दर्शन दिए। सब संगत ने बड़े अनुशासन में बैठकर बाबा जी के दर्शन किए।बाबा जी करीब नौ बजे सत्संग घर पहुंचे।पहले बाबा जी मंगलवार को राजपुरा सत्संग घर में पहुंचे हुए थे।पहले तो संगत को बताया गया था कि पटियाला भी आज ही आएंगे।इसलिए संगत मंगलवार को ही पहुंच गयी थी।संगत जी मंगलवार को ही सुबह से ही जुडनी शुरू हो गयी थी और दो तीन बजे तक बहुत संगत इक्टठी हो गयी थी।पाठी शब्द पढ रहा था और संगत भी बडे प्यार से पीछे पीछे शब्द पढ रही थी।लेकिन शाम को सूरज छिपने के बाद पाठी ने अनासमैंट की कि बाबा जी ने राजपुरा में बडे खुलकर संगत को दर्शन दिए और सतंसग किया।फिर सवाल जवाब भी हुए।सो आज का प्रोग्राम कैसल कर दिया गया है।बाबा जी सुबह नौ बजे संगत को दर्शन देंगे।एक बार तो संगत जी बहुत मायुस हो गई।संगत की आंखों में पानी आ गया। पर सब को सुबह का इंतजार था।सुबह अंधेरे से ही संगत इक्टठी होना शुरू हो गई थी।सेवादार बडे प्यार से ठंड में सेवा कर रहे थे।हर किसी के चेहरे पर चमक थी।सब बडी बेसबरी से बाबा जी का इंतजार कर रहे थे।सेवादार वीर और सेवादार बहन बडे प्यार से पूरे जोश से सेवा कर रहे थे।ऐसे तो हम अपने घर के प्रोग्राम में भी नहीं कर सकते।पर यहां तो बाबा जी कि दया मेहर जो

थी।
आखिर वो घडी आ गई जब बाबा जी संगत के बीच पहुंचे।संगत कल के मुकाबले बहुत ज्यादा हो गई थी।बहुत से तो ऐसे लोग थे जो गैर सत्संगी थे और पहली बार बाबा जी के दर्शन कर रहे थे।सब एक टक हो के बाबा जी के दर्शन कर रहे थे।हवा भी जैसे रुक सी गई थी,पक्षी भी जैसे चहकना भूल गये थे।एकदम खोमोशी छा गई थी।जिनको ज्यादा तडपना थी उनकी आंखों से आंसू नहीं रूक रहे थे।भावनाएं बेकाबू हो कर फूट पडी थी।बाबा जी ने बडे खुले दिल से संगत में पैदल चलते हुए अपने स्वरूप से संगत को निहाल कर दिया।संगत को दर्शन देकर बाबा जी थोडे वक्त का पर बहुत अच्छा सत्संग किया। फिर उसके बाद बच्चों से सवाल जवाब हुए।एक लडकी ने बाबा जी कहा कि बाबा जी आपके दर्शन करके रूह खुश हो गई,आप ब्यास भी ऐसे ही पैदल चलकर दर्शन दिया करो।बाबा जी ने मजाकिया लहजे में कहा कि भई अब ये शरीर बूढा हो गया है कुछ रहम करो।इस पर सारी संगत हंसने लगी।सो बाबा जी की बडी रहमत हुई।सारी संगत बहुत भाग्यशाली महसूस कर रही थी।हे मेरे सतगुर,परमपिता तेरे चरणों की धूल बना लो मैं उड के कभी इधर उधर भटकता रहता हूं।अब मुझ इस अभागे जीव को दया करके अपने चरणों में जगह दो।
सभी प्यारे सतसंगी भाई बहनों और दोस्तों को हाथ जोड़ कर प्यार भरी राधा सवामी जी..

राम सरण शर्मा says:

बहुत सुंदर प्रसंग है जी। राधास्वामी जी।

radha soami ji.khushi hoe ki baba ji ne sangat ko dsrshan diye.

Amrinder singh says:

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