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परमात्मा की मौज उठी तो उसने सारी सृष्टी बनाई. सारा यह..

शुरु में परमात्मा की मौज उठी तो उसने सारी सृष्टी बनाई. सारा यह ब्रहमांड बनाया और अपने अंशों यानि आत्माओं से कहा अब इस ब्रहमांड के खेल का हिस्सा बनो.
उन आत्माओं में से कई आत्मायें अपने असल को छोड़ने के लिये राजी न हुई और कई हो गई.
परमात्मा ने सभी आत्माओं को अपने पास वापस बुलाने का वादा भी किया और कहा मैं खुद ही मनुष्य रुप धारण करके धरती पर आऊंगा और धीरे धीरे करके उन आत्माओं को लेकर जाऊंगा जो इस संसार के खेलों से त्रस्त होकर मुझे याद करेगी और मेरे प्यार की याद के वियोग में रोयेगी.
परमात्मा ने कहा मैं हर युग हर समय धरती पर मौजूद रहूंगा और मुझ तक पहुंचने का रास्ता दिखाकर अपने साथ ले जाता रहुंगा.
इस तरह हम यानि आत्मायें इस संसार में तो आ गई हैं पर हमारे जाने का रास्ता जब वह परमात्मा किसी मनुष्य (गुरू) रुप में आकर हमें बताता है और हम जाने की तैयारी करके उनके बताये गये तरिके पर चलेंगे तो वापस वहीं जा पायेंगे जहां से आये हैं.
(हॉ गुरु के बताये गये इस रास्ते को जीते जी मरना भी कहा जा सकता है.
जब हम अभ्यास पर बैठेंगे तो हमारी आत्मा पॉव से लेकर सिमटना शुरु करती है और दसवे द्वार यानि दोनो ऑखों के बीच जहॉ तिलक किया जाता है वहॉ आकर ऊपर चड़ाई करती है.
जब ऊपर मंडलों में जाती है तो शरीर तो खाली हो जाता है पर आत्मा का कनेक्शन रहता ही है.
फिर आत्मा इसी रास्ते से वापस शरीर में आती है.
एसा हमेशा करते रहने से हमारे अंदर से मृत्यु का डर निकल जाता है.)
स्वामी जी महाराज कहते हैं
“राधास्वामी धरा नर रुप जगत में गुरु होय जीव चिताये”
आत्मा के आने के रास्ते हैं
जैसे किसी बीज द्वारा पैदावर फल, अन्न, साग, सब्जी आदि
मौसमानुसार पैदा होने वाले कीड़े ,इल्लियॉ आदि
अंडों से निकलने वाले जीव पक्षी, सॉप, छिपकली आदि
गर्भ से निकलने वाले जीव मनुष्य ,चौपाया जानवर आदि.
आत्मायें आती तो इन रुपों में है पर जाती हैं ,
सिर्फ गुरु के बताये मार्ग पर चलकर वो भी सिर्फ मनुष्य जन्म में ही किसी अन्य जामें में नहीं….

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