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Engineer Sahab ki sakh send by Sewadaar

वीरवार…. सदा की तरह अपनी सेवा
पर लंगर टी स्टाल पे… दोपहर लंच के बाद
इंजीनियर साहब के साथ कुछ समय बिताने का
मौका मिला… इस बार कई महीने बाद… जब भी
उनके पास बैठते हैं तो कोई न कोई किस्सा निकल
ही आता है… तो बात गीत संगीत में बाबा जी की
रूचि को ले कर होने लगी…
हयेंस पार्क में बाबा जी नें संगत से खूब गीत,
कव्वाली और शब्द सुने और साथ साथ खुद भी
गुनगुनाते रहे थे… इसी बात को लेकर इंजीनियर
साहब नें एक दो बातें सांझा की…
बाबा जी कव्वाली के बहुत शौकीन हैं खास कर
अदनान सामी की वो कैसेट जब आई थी…
कभी तो नज़र मिलाओ… थोड़ी सी तो लिफ्ट करा
दे… बाबा जी को बहुत पसंद आए थे उसके गाने…
कार में किसी जगह जाते हुए उनहोंने ड्राईवर से
कोई गाना चलाने को कहा तो उसने यही कैसेट
लगा दी… पिछली सीट पर इंजीनियर साहब और
आई जी साहब मौजूद थे… रास्ता लंबा था तो बार
बार लूप में बाबा जी यही गाने सुनते रहे… फिर
पीछे देख कर बोले… देख लो आई जी साहब एह
की कहंदा… ” थोड़ी सी तो लिफ्ट करा दे “…
वो मुस्कुरा कर बोले… हांजी हांजी वो तो कह रहा
है… हम सब भी कहते रहते हैं… ” पर आप ही गौर
नहीं करते “… और बाबा जी भी मुस्कराने लगे…
फिर चाए के बारे बात होने लगी… मैनें कहा
आपको गर्मा गर्म चाय का एक कप पिलाता हूं तो
तो इंजीनियर साहब नें कहा मैने अब चाय पीना
कम कर दिया है…कब्ज करती है.. कढी चावल
के बाद तो वैसे भी चाय का मन नहीं होता…
“हर वीरवार डेरे में लंगर में कढी चावल बनते हैं…
कई लोग (संगत) तो खास इसे खाने जालंधर, अमृतसर, और लुधियाना, कपूरथला आदि से भी
पहुंच जाते हैं…”
तो साहब बोले पहले मैं बहुत चाय पीता था..
उनकी इसी आदत को देख कर बाबा जी नें उनके
आफिस के बाहर खास तौर पर चाय की मशीन

लगवा दी थी…बोले… भाई किनी कु पी लवेगा…
एक बार डेरा आफिसरों की मीटिंग में साहब ने
बाबा जी से कहा कि बाबा जी मीटिंग में कम से
कम चाय तो मंगवा लेते तो बाबा जी हंस कर बोले…
ओ भाई इनहा दे नखरे बहुत आ.. किसे नें फिक्की
पीनी किसे ने मिट्टी.. किने नें जायदा दूध वाली ते
किसे ने बलैक टी… हुन मैं कीदी कीदी फरमाईश
पूरी करूगा… सब हंसने लगे… फिर बोले पर तूं
जांदा जांदा आफिस चों हो के जाईं… बोले जब मैं
आफिस में गया तो वहां मेरे लिए गर्मा गर्म चाय का
कप इंतजार कर रहा थाऔर साथ में बर्फी भी…
बोले… मुझे बर्फी बहुत पसंद है.. बाबा जी को पता
था… अब देख लो उनहें पता था कि मैं मीटिंग में
चाय की बात करने वाला हूं और बर्फी तो साथ में
बोनस मिल गया…
फिर यादों के पिटारे से एक बात और निकाली…
बोले सिकंदरपुर में जब शैड का काम मेरी निगरानी
में चल रहा था तो मैं परिवार सहित वहीं शिफ्ट हो
गया था काम लंबा चलना था तो एक दिन बाबा जी
इस्पैकशन करने आए तो बोले… तेरा कमरा कित्थे
है… मैं उनको ले गया… कुछ देर रुके फिर चलते
चलते बोले.. किसे आए गये नूं चा वी पुछ लयी दी
है कि तुहाडे रिवाज़ नहीं… ” मैं सच में पूछना भूल
गया था… ” मैने कहा बाबा जी अभी बनवाया हूं
आप बैठो… बोले मंग के पीती तां की पीती… और
हंसते हुए चलने लगे बोलो डेरे आईं इकट्ठे बैठ के
पीवांगे… बाबा जी को चाय बहुत पसंद है पर वो
अपनी मर्जी की बनवा कर पीते हैं… एक बार मैने
पूछा बाबा जी आप ले लिए जो चाय बनती है सच
में बहुत टेस्टी होती है इसमें क्या डलवाते हो आप
….हंसते हुए बोले… ऐदां तेनू क्यों दसां पहला मैनु
इह फार्मूला पेटैंट करवा लैन दे… तूं नकल मार
लवेंगा… यह सब बातें करते हुए इंजीनियर साहब
कुछ भावुक हो गये और एक दम से उठ कर चल पड़ेगा बोले.. चलता हूं “असली कम” करिए जा के
गल्लां तां खत्म नी होनियां…

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